Friday, 15 May 2020

ओह माँ ये दुनिया रे तेरे आंचल से छोटी हैं || लल्ला लल्ला लोरी रे दूध की कटोरी रे

ओह माँ ये दुनिया रे तेरे आंचल से छोटी हैं  , रे तेरे आंचल से छोटी हैं

लल्ला लल्ला लोरी रे दूध की कटोरी रे

लल्ला लल्ला लोरी रे दूध की कटोरी रे

दूध में बतासा रे , दूध में बतासा रे  हम सब करे तमासा रे

लल्ला लल्ला लोरी रे दूध की कटोरी रे

ओह माँ ये दुनिया रे तेरे आंचल से छोटी हैं  , रे तेरे आंचल से छोटी हैं

 

बचपन में इक रूपया ज़िद से जो माँगा था

बचपन में इक रूपया ज़िद से जो माँगा था

उसकी खान खान के आगे दोलत खोटी है

ओह माँ ये दुनिया रे तेरे आंचल से छोटी हैं  , रे तेरे आंचल से छोटी हैं

 

थाली में लेकर खाना मेरे पीछे पीछे आना

थाली में लेकर खाना मेरे पीछे पीछे आना

तिन सुखी रोटियों से सरे दर्शन समझाना

कहना मत मुह फेरिये अयसे नहीं आया है

कहना मत मुह फेरिये अयसे नहीं आया है

जला खून बाप सीना तब जा कमाया है

खा ले खा ले बेटे ये मेहनत की रोटी हैं

ओह माँ ये दुनिया रे तेरे आंचल से छोटी हैं  , रे तेरे आंचल से छोटी हैं

 

खुद तो मटमैली हो गयी मुझको चमकाने में

खुद तो मटमैली हो गयी मुझको चमकाने में

खुद को बुझा लिया है मेरा दिया जलाने में

मेरी बलाये लेती रहती है खूब परेसा

मेरे लिए सपने बुनती काट खुद को रेसा रेस

येसी तो इस दुनिया में बस माँ ही होती है

ओह माँ ये दुनिया रे तेरे आंचल से छोटी हैं  , रे तेरे आंचल से छोटी हैं

लल्ला लल्ला लोरी रे दूध की कटोरी रे

लल्ला लल्ला लोरी रे दूध की कटोरी रे


जब प्रसिद्ध लेखक नीलोत्पल मृणाल को ...

कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे

कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे 
 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे 
हाथों में था मेरे माटी का खिलौना रे    
वही मेरे चाँदी था वही सोना रे -२
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे, दिन वो सलोना रे 

जहा मन जाते थे , जो मन खाते थे 
गेंदा के फूलों से तित्तली उड़ाते थे     -२
दोनों हाथ ऊपर करके हवा हवा होना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे

माट्टी हम  खाते थे , धुल में नहाते थे 
सारी धरती थी आपनी कही लोट जाते थे -२
हरी हरी घास वाला कोमल बिछोना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे 

आसमा पे आखें थी हाथ में सितारा था 
चाँद मेरा मामा था सूरज भी हमारा था -२
कोन नहीं चाहता था हय मेरा होना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे 

चाँद तारे तोड़ लेंगे कुछ भी सोच लेते थे 
टॉफी नहीं मिलती थी तो बाल नोच लेते थे -२
इक जरा सी डाट पर फुट फुट रोना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे दिन वो सलोना रे

हाथों में था मेरे माटी का खिलौना रे    -२ 
वही मेरे चाँदी था वही सोना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे दिन वो सलोना रे 
  • कहाँ गया, हाय मेरा दिन वो सलोना रे ...

Wednesday, 13 May 2020

तेरा नाम नहीं / निदा फ़ाज़ली

तेरे पैरों चला नहीं जो
धूप छाँव में ढला नहीं जो
वह तेरा सच कैसे,
जिस पर तेरा नाम नहीं?
तुझसे पहले बीत गया जो
वह इतिहास है तेरा
तुझको हीं पूरा करना है
जो बनवास है तेरा
तेरी साँसें जिया नहीं जो
घर आँगन का दिया नहीं जो
वो तुलसी की रामायण है
तेरा राम नहीं.
तेरा हीं तन पूजा घर है
कोई मूरत गढ़ ले
कोई पुस्तक साथ न देगी
चाहे जितना पढ़ ले
तेरे सुर में सजा नहीं जो
इकतारे पर बजा नहीं जो
वो मीरा की संपत्ति है
तेरा श्याम नहीं.
निदा फ़ाज़ली का समस्त लेखन | रेख़्ता
                                                     तेरा नाम नहीं / निदा फ़ाज़ली