Friday, 15 May 2020

कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे

कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे 
 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे 
हाथों में था मेरे माटी का खिलौना रे    
वही मेरे चाँदी था वही सोना रे -२
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे, दिन वो सलोना रे 

जहा मन जाते थे , जो मन खाते थे 
गेंदा के फूलों से तित्तली उड़ाते थे     -२
दोनों हाथ ऊपर करके हवा हवा होना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे

माट्टी हम  खाते थे , धुल में नहाते थे 
सारी धरती थी आपनी कही लोट जाते थे -२
हरी हरी घास वाला कोमल बिछोना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे 

आसमा पे आखें थी हाथ में सितारा था 
चाँद मेरा मामा था सूरज भी हमारा था -२
कोन नहीं चाहता था हय मेरा होना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे ,दिन वो सलोना रे 

चाँद तारे तोड़ लेंगे कुछ भी सोच लेते थे 
टॉफी नहीं मिलती थी तो बाल नोच लेते थे -२
इक जरा सी डाट पर फुट फुट रोना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे दिन वो सलोना रे

हाथों में था मेरे माटी का खिलौना रे    -२ 
वही मेरे चाँदी था वही सोना रे 
कहाँ गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे दिन वो सलोना रे 
  • कहाँ गया, हाय मेरा दिन वो सलोना रे ...

No comments:

Post a Comment